आज कितने दिनों बाद , जब गुजरे हम उन पुरानी गलियों से
हर कदम पर जैसे एक , जमाना गुजर रहा था
वो तपती धुप में नंगे पैरो में , याद आता है बहुत आम चुराना
वो यारो का साथ, हाथो में वो हाथ ,
नन्ही हथेलियो में था , खुशियों का खजाना
वो छोटी छोटी बातों की , बड़ी बड़ी खुशियाँ
आज भी लबो पे छोड़ जाती है , तबस्सुम का खजाना
आज कितने दिनों बाद जब गुजरे हम पुरानी उन गलियों से ................