Sunday, May 3, 2009

पुरानी गलियों से !!!

आज कितने दिनों बाद , जब गुजरे हम उन पुरानी गलियों से

हर कदम पर जैसे एक , जमाना गुजर रहा था

वो तपती धुप में नंगे पैरो में , याद आता है बहुत आम चुराना

वो यारो का साथ, हाथो में वो हाथ ,

नन्ही हथेलियो में था , खुशियों का खजाना

वो छोटी छोटी बातों की , बड़ी बड़ी खुशियाँ

आज भी लबो पे छोड़ जाती है , तबस्सुम का खजाना

आज कितने दिनों बाद जब गुजरे हम पुरानी उन गलियों से ................

Wednesday, April 29, 2009

हम क्या करे ?????

जिन्दगी में हम करना तो बहुत कुछ चाहते है पर कर क्यो नही पाते ? कभी सोचते ये करना है , कभी ये नही कुछ और करना है ये सोचते सोचते कितना वक्त निकल जाता है , और हम जान ही नही पाते है की हम कहा से कहा पहुँच गए हम में से कितने लोग है जो ये सोचने में इतना टाइम लगा देते है , की भविष्य में करना क्या है , और जब करना चाहते है तो वो वक्त ही निकल गया होता है ऐसा क्यो है ? हमे जो करना होता है हम क्यो निर्णय नही ले पाते क्यो ? हम वो रास्ता ही नही देख पाते है जिस पर जाना होता है शायद हमे कोई बताने वाला नही होता, और हम हर तरफ हाथ पैर मारते रहते है ,पानी भरे दरिया में की कही तो किनारा मिलेगा पर ये नही पता होता है की किस दिशा में जाने पर किनारा मिलेगा आज कल छात्र उच्च शिक्षा की डिग्री भी कर लेते है , फील्ड भी चुन लेते है, पर उस फील्ड में क्या वर्क करना है ये निर्णय नही ले पाते आज लाखो छात्रो की ये समस्या है , और ये समस्या वैसे की वैसे ही बनी हुई है क्यो ?

Monday, March 23, 2009

माय फीलिंग अबाउट लाइफ

जिन्दगी क्या है ,कितनी बार
ये सवाल जेहन में आया है
कभी लगा धुप ही धुप है , रास्तों में
पर एक पल के लिए ,छाव जब भी पाया है,
बैठे एक पल , सुस्ताने के लिए
बदल के हटते ही , धुप को ही पाया है
फिर सोचा मैंने ............................!!
सूरज के आगे , ये बदल कब tik paya है


जिन्दगी में हमेशा उजाले क्यो नही होते ,
इस सवाल का भी , ज़वाब कुछ यू आया है
उजाले अंधेरे दो पहलू है एक सिक्के के ,
तो फिर क्यो अक्सर मैंने .......................!
दोनों पहलुओ को एक सा पाया है


सुना है हमने जिन्दगी जीने के लिए
एक मकसद होना जरुरी है
पर जिनके पास कोई मकसद नही होता
अक्सर ही चैन से जीते पाया है
जिन्दगी क्या है कितनी बार ये सवाल मेरे जेहन में आया है

Tuesday, December 2, 2008

भारतीय सभ्यता के होते तार - तार

आज की भागम भाग जिन्दगी में सभी एक दुसरे से आगे बढ्ने में लगे हुए है , आज का युवा वर्ग कामयाबी को हरहाल में गले लगना चाहता है उसके लिए रास्ता चाहे जो भी अपनाना पड़े ,चैबिस घंटे काम करने का जूनून , खाने के लिए टाइम नही है ,वैसे फास्ट फ़ूड तो है ना ! पेट ही तो भरना है , और रात तो इनके लिए दिन की शुरुवात होती है रात के ये बेताज बादशाह बाइक पर फर्राटे मरते हुए ,बियर में ख़ुद डुबोकर , चरम सुख का अनुभव करते है और आज कल तो भारतीय बेटी भी पीछे नही है एक हाथ में सिगरेट दुसरे में बियर से भरा जाम आख़िर बात लड़को से कदम से कदम मिलकर चलने की है, तो वह भी एस प्रगति पथ पर तेजी से बढ़ रही है , डर है कही पीछे न रह जाए
आज का ये युवा वर्ग कामयाबी को अपनी मुठ्ठी के अन्दर पाकर अपने आप को सातवे आसमान पर पाते है , और पश्चमी सभ्यता पर तो जन्म सिद्ध अधिकार है इनका, अरे भाई !फैशन में भी तो अप-टू-डेट रहना है शापिंग मॉल क्यो होते है ? और ये मोटी सैलरी लिए कमाते है पर क्या असल मायने में ये एक कामयाबी की ओर बढ़ रहे है या फिर सिर्फ एक छलावे में जी रहे है