Tuesday, December 2, 2008

भारतीय सभ्यता के होते तार - तार

आज की भागम भाग जिन्दगी में सभी एक दुसरे से आगे बढ्ने में लगे हुए है , आज का युवा वर्ग कामयाबी को हरहाल में गले लगना चाहता है उसके लिए रास्ता चाहे जो भी अपनाना पड़े ,चैबिस घंटे काम करने का जूनून , खाने के लिए टाइम नही है ,वैसे फास्ट फ़ूड तो है ना ! पेट ही तो भरना है , और रात तो इनके लिए दिन की शुरुवात होती है रात के ये बेताज बादशाह बाइक पर फर्राटे मरते हुए ,बियर में ख़ुद डुबोकर , चरम सुख का अनुभव करते है और आज कल तो भारतीय बेटी भी पीछे नही है एक हाथ में सिगरेट दुसरे में बियर से भरा जाम आख़िर बात लड़को से कदम से कदम मिलकर चलने की है, तो वह भी एस प्रगति पथ पर तेजी से बढ़ रही है , डर है कही पीछे न रह जाए
आज का ये युवा वर्ग कामयाबी को अपनी मुठ्ठी के अन्दर पाकर अपने आप को सातवे आसमान पर पाते है , और पश्चमी सभ्यता पर तो जन्म सिद्ध अधिकार है इनका, अरे भाई !फैशन में भी तो अप-टू-डेट रहना है शापिंग मॉल क्यो होते है ? और ये मोटी सैलरी लिए कमाते है पर क्या असल मायने में ये एक कामयाबी की ओर बढ़ रहे है या फिर सिर्फ एक छलावे में जी रहे है

3 comments:

samir said...

sab ke sab chalwe me hi jee rahein hain kese ko bhi sukoon nahi hai itna sab honte ke bad bhi

moazzam ali said...

so wats the solution mam to improve this living style..

tahir4u said...

kya bat.....aaj ki nari ki soch ko main dhyan rakthe hua main kahta hu ki ....nari apne lakh me bhi purush ka khayal rakhti hai unke zindagi ki thakan ka bhi dhyan rakhti hai......sweta ji se main bilkul ahmat hu or inka main samman karta hu.....